ब्लॉगजगत, बताइए, मैं कुछ कहूं या चुप रहूं…खुशदीप

बेवक्त ये गाना मैं आपको सुना रहा हूं…ब्लॉगिंग के 14 महीने में आज एक ऐसी घटना मेरे साथ हुई जो पहले कभी नहीं हुई…इसलिए कभी सोचता हूं कि मैं कुछ कहूं…कभी सोचता हूं कि मैं चुप रहूं…अब रात को ही किसी नतीजे पर पहुंच पाऊंगा…तब तक इस गीत के ज़रिए ही अपने अंदर की कशमकश दिखाता हूं…

या दिल की सुनो दुनियावालों,
या मुझको अभी चुप रहन दो,


मैं गम को खुशी कैसे कह दूं,
जो कहते हैं, उनको कहने दो,


ये फूल चमन में कैसे खिला,
माली की नज़र में प्यार नहीं,


हंसते हुए क्या क्या देख लिया,
अब बहते हैं आंसू बहने दो,


ये ख्वाब खुशी का देखा नहीं
देखा जो कभी तो भूल गए,


मांगा हुआ तुम कुछ दे ना सके,
जो तुमने दिया वो सहने दो,


क्या दर्द किसी का लेगा कोई,
इतना तो किसी में दर्द नहीं,


बहते हुए आंसू और बहे,
अब ऐसी तसल्ली रहने दो,

या दिल की सुनो दुनियावालों,
या मुझको अभी चुप रहने दो…

Khushdeep Sehgal
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Shah Nawaz
15 years ago

क्या हुआ खुशदीप भाई? सब खैरियत तो है ना?

डा० अमर कुमार


ऒऎ खुशदीप पुत्तर, ठँड रख !
हलाल किया गया तेरा कॅमेन्ट मैं छापूँगा, क्योंकि मुझे बीस मिनट में ऑफ़िस पहुँचने की कोई जल्दी नहीं है ।
आज तक पूरा देश मलेरिया से ग्रस्त है, क्योंकि वह कुनैन की गोली से डरता है, और पड़ोसी के घर कूड़ा फ़ेंकता है ।
खुद को बुद्धिजीवी घोषित कर बाकियों को छद्म-बुद्धिजीवी करार देता है, और मुन्नी बदनाम का दागदार लहँगा पहन यहाँ भीड़ में घुस कर तमाशा देख रहा है, ऒऎ खुशदीप पुत्तर, ठँड रख !

शरद कोकास

मेरी मानो तो आप दिमाग की सुनो । दिल तो…. ।

Unknown
15 years ago

kah daalo bhaai !

राजीव तनेजा

क्या हुआ सर जी? …

डॉ टी एस दराल

इंतजार है ।

मनोज भारती

गैरो में क्या दम था, हमें तो अपनों ने लूटा
मेरी कश्ती तो वहां ढूबी जहां पानी कम था !!

किसी निकटतम बँधु ने दुख पहुँचाया है ॥ भाई खुशदीप जी खुश रहिए ।

मुन्नी बदनाम

very good idea darling.

rashmi ravija
15 years ago

ऐसा क्या हो गया, खुशदीप भाई…जो ये गाना याद आ गया?
कह डालिए अपने मन की.

संजय @ मो सम कौन...

कह देना चाहिये। अगर ब्लॉग एक परिवार की तरह है तो कहना गलत नहीं है।

Gyan Darpan
15 years ago

अब कह भी दीजिये

dhiru singh { धीरेन्द्र वीर सिंह }

एक चुप सौ को हराता है . दिल की ही सुनिये .
.
.
.
यह टंकी पर चढने वाली बात ना हो तो अच्छा

राज भाटिय़ा

खुशदीप भाई जो कहना है खुल कर कहॊ, डर किस बात का चलो इंतजार हे आप की बात का…..

shikha varshney
15 years ago

कह ही डालिए अब 🙂

बेनामी
बेनामी
15 years ago

बंद हो मुट्ठी तो लाख की
खुल गई तो फिर खाक की

इशारों को अगर समझो….

निर्मला कपिला

खुशदीप का काम है खुश रहना और दूसरों को खुश रखना दूसरों को खुश रखने के लिये आँसू तो पीने ही पदते है
वो बस हसाना जानता है
सब को लुभाना जानता है।
जल्दी से कशमक्श से निकलो। आशीर्वाद।

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद

चुप हूं तो कलेजा जलता है
बोलूं तो तेरी रुसवाई है 🙂

शिवम् मिश्रा

यहाँ लिखा नहीं ….. फोन उठा नहीं रहे ….पता कैसे चले क्या हुआ है ???

अजय कुमार झा

खुशदीप भाई , जब आप ऐसा कह रहे हैं तो इसका मतलब कि कुछ बहुत ही गंभीर अपने भीतर लिए बैठे हैं ….और हम तो यही कहेंगे कि ..ले आईये सब कुछ बाहर ..फ़िर जो भी उसका नतीजा

Unknown
15 years ago

हमारे विचार से तो चुप रहने से कह देना बेहतर है।

Udan Tashtari
15 years ago

अब तो टेंशन हो रही है कि क्या हुआ…जल्दी बताओ.

अन्तर सोहिल

दिल की गिरह खोल दो……………॥
कहूँ या
राज को राज रहने दो…………॥

कुछ समझ नहीं पाया।
शुभ हो, बस यही प्रार्थना है जी

प्रणाम

स्वप्न मञ्जूषा

इतना सस्पेंस काहे को..
अब कह भी दीजिये….हाँ नहीं तो…!!

vandana gupta
15 years ago

ye to thik hai magar baat kya hai wo bhi to batate.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

यह गीत बहुत ही प्यारा सन्देश दे रहा है!

Satish Saxena
15 years ago

दर्दनाक है खुशदीप भाई ……खुदा खैर करे 🙂

दीपक बाबा

खुशदीप सर, चुप मत रहिये……….. जो कहना हो वो कहिये…. बाकि रहे दुनिया वाले – उनका काम है कहना – कुछ तो वो जरूर कहेंगे.
पर दिल में बात रखने से बंद ज्यादा परेशान होता है – मैं ये मानता हूँ.

Apanatva
15 years ago

aisee bhee kya baat hai bhai……..?

shubhkamnae .

समय चक्र
15 years ago

बढ़िया प्रस्तुति..चिट्ठाजगत की बत्ती जली मिली … चिट्ठाजगत टीम को बधाई.

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