अजनबी बन जाएं हम दोनों…खुशदीप


चलो इक बार फिर से, अजनबी बन जाएं हम दोनों
चलो इक बार फिर से…

न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखूँ दिलनवाज़ी की,
न तुम मेरी तरफ़ देखो गलत अंदाज़ नज़रों से,
न मेरे दिल की धड़कन लड़खड़ाये मेरी बातों से,
न ज़ाहिर हो तुम्हारी कश्मकश का राज़ नज़रों से,
चलो इक बार फिर से, अजनबी बन जाएं हम दोनों,
चलो इक बार फिर से…

तुम्हें भी कोई उलझन रोकती है पेशकदमी से,
मुझे भी लोग कहते हैं कि ये जलवे पराए हैं,
मेरे हमराह भी रुसवाइयां हैं मेरे माझी की,
तुम्हारे साथ भी गुज़री हुई रातों के साये है,
चलो इक बार फिर से, अजनबी बन जाएं हम दोनों,
चलो इक बार फिर से…

तार्रुफ़ रोग हो जाये तो उसको भूलना बेहतर
ताल्लुक बोझ बन जाये तो उसको तोड़ना अच्छा,
वो अफ़साना जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन,
उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा,
चलो इक बार फिर से, अजनबी बन जाएं हम दोनों,
चलो इक बार फिर से…

 

Khushdeep Sehgal
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डॉ टी एस दराल

शुक्रिया , इस शानदार गाने के बोल देने के लिए।
मज़ा आ गया।

shikha varshney
13 years ago

सटीक ….
अभी और बहुत गीत गाये जाने बाकी हैं वैसे 🙂

राजेश सिंह

ताल्लुक बोझ बन जाये तो उसको तोड़ना अच्छा

व्यावहारिकता इसी को कहते है और समझदारी भी,वाह -वाह

anshumala
13 years ago

अभी इतनी जल्दी कुछ मत कहिये ये घाट घाट का पनी पिए लोग होते है , फायदा दिखा तो कुछ दिन बाद गाते मिलेंगे " खुलम खुल्ला प्यार करेंगे हम दोनों इस दुनिया से नहीं डरेंगे हम दोनों "

प्रवीण पाण्डेय

बहुत सोच समझ कर लिखे गये हैं ये गाने।

chander prakash
13 years ago

खुशदीप जी,

चुनाव के बाद के हालात के लिए कुछ और गाने ढूंढ़ कर रखिए
– अजनबी तुम जाने पहचाने से लगते हो, ये बड़ी अजीब सी बात है ( किशोर कुमार – हम सब उस्ताद हैं ।
– हमसे का भूल हुई जो यह सजा हमको मिली ( अनवर – जनता हवलदार )
– सोचा था क्या हो गया, क्या हो गया ( नूरजहां – अनमोल घड़ी )

ताऊ रामपुरिया

इस अफ़्साने को इस खूबसूरत मोड पर छोडने की सजा तो आखिर जनता को ही भुगतनी है. सांडो का क्या? वो तो पाला बदल लेंगे.

रामराम.

Satish Saxena
13 years ago

शुभकामनायें खुशदीप भाई !!
नंगपन की अब कोई हद मुक़र्रर नहीं…

Unknown
13 years ago

सेक्युलर बन ने से तो अच्छा है की अजनबी ही बन जाये सेक्युलर का मतलब एक आंख से अँधा जिसको बस एक का ही पक्ष नज़र आता है दुसरे का साथ कुछ हो तब बोलती बंद रहती है ….

जय बाबा बनारस…

सञ्जय झा
13 years ago

(:(:(:

pranam.

BS Pabla
13 years ago

चलो इक बार फिर से

अनूप शुक्ल

गाना तो ये भी चल रहा होगा- अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं।

मुकेश कुमार सिन्हा

bhaiya ye dono to shuru se ajnabhi hi the…….:) shayad ye ek matra photo hogi, jisme dono saath the…:)

Khushdeep Sehgal
13 years ago

शुक्रिया अशोक जी…

जय हिंद…

Khushdeep Sehgal
13 years ago

प्राण जी कहां ये कालजयी गाने और कहां आजकल का कचरा…

किसी ने सही कहा है भारतीय संगीत ने कितनी तरक्की की है…कुंदनलाल सहगल से शुरू हुआ था, बाबा सहगल तक पहुंच गया है…

जय हिंद…

अशोक सलूजा

सटीक निशाने पे बैठा है …..
बधाई!

Unknown
13 years ago

कुछ कालजयी गाने तो शायद इसलिए लिखे जाते हैं कि, याद आते रहें. सुंदर सोच ..!

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