जीवन के संध्याकाल में सभी को जाना है…ये शाश्वत सत्य है, लेकिन रोज़ की भागदौड़ मे शायद ही हमें ये याद रहता है…सुनने, सोचने, समझने की आज जो हमारे पास शक्ति है,... Read more »
नया रोज़गार ढूंढ लिया है मैंने वन डे वर्ल्ड चैंपियन टीम इंडिया आस्ट्रेलिया में ट्राई सीरीज़ से करीब करीब बाहर हो चुकी है…श्रीलंका से मैच चल रहा है, अभी तक इसमें भी धोनी एंड कंपनी का रवैया... Read more »
1994 में करिश्मा कपूर और गोविंदा की फिल्म खुद्दार में एक गाने के बोल थे- सेक्सी, सेक्सी, सेक्सी मुझे लोग बोलें, हाय सेक्सी हेलो सेक्सी क्यूं बोले...गाने पर बवाल हुआ…सेंसर बोर्ड को... Read more »
पिछले साल उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमाअंसारी के एक बयान को लेकर खूब हो हल्ला हुआ था।सलमा अंसारी ने कहा था कि हमारे देश में मां – बाप कोअपने यहां बेटी... Read more »
जो पहले कभी छोटे नवाब थे…अब बड़े नवाब हैं…अब नवाब साहब से कोई आवाज़ नीची करने के लिए कहने की गुस्ताख़ी कैसे कर सकता है…वो भी जब नवाब साहब के साथ... Read more »
एक मल्टीनेशन कंपनी का सीईओ अपनी नई जगुआर कार पर साइडलेन से गुज़र रहा था…वो पार्क की गई कारों के बीच से निकलते-दौड़ते इक्का-दुक्का बच्चों को देख रहा था…साइडलेन में होने के बावजूद गाड़ी रफ्तार में थी…तभी उसकी कार के एक दरवाज़े पर पत्थर लगने जैसी आवाज़ सुनाई दी…सीईओ ने झट से ब्रेक लगाए…आगबबूला कार से निकला..आसपास देखा…एक बच्चा दिखाई दिया…सीईओ उसे पकड़ कर ज़ोर से डांट पिलाने लगा…जानते हो तुमने क्या किया है…ये कौन सा खेल है…नई कार का सत्यानाश कर दिया… डेंट ठीक कराने में कितने पैसे लगेंगे, कुछ पता भी है… बच्चे ने दयायाचना के अंदाज़ मे कहा…आई एम रियली सारी सर, लेकिन मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूं…मैंने पत्थर इसलिए फेंका क्योंकि कोई रूक नहीं रहा था…ये कहते हुए बच्चे की आंखों के आंसू उसके गालों तक छलक आए थे… बच्चे ने फिर उंगली से एक पार्क की हुई कार के साइड में इशारा किया…ये मेरा भाई है…पगडंडी से व्हील चेयर का पहिया फिसलने की वजह से नीचे गिर गया है..उसे चोट भी आई है…लेकिन उसका वजन ज़्यादा होने की वजह से मैं उसे उठा नहीं पा रहा…क्या आप उसे व्हील चेयर पर बिठाने में मेरी मदद करेंगे… सुबकते बच्चे के सामने सीईओ अब निशब्द खड़ा था…उसे अपने गले में कुछ अटका महसूस हुआ..जल्दी ही वो संभला और उसने बच्चे के भाई को व्हील चेयर पर बिठाया…जेब से रूमाल निकाल कर मिट्टी के दागों को साफ़ किया…बच्चे के भाई को कुछ खरोचें ही आई थी…कोई गंभीर बात नहीं थी…बच्चे ने फिर सीईओ को शुक्रिया कहा..,और भाई की व्हीलचेयर को धकेलते हुए पगडंडी पर अपने घर की तरफ़ चल दिया…सीईओ कुछ देर वहीं खड़ा ये दृश्य देखता रहा…फिर वो धीरे कदमों से अपनी कार की तरफ बढ़ा… कार के दरवाज़े पर अच्छा खासा डेंट पड़ गया था…लेकिन सीईओ ने उस डेंट को कभी सही नहीं कराया…सिर्फ इसलिए कि ये संदेश उसे हमेशा मिलता रहे...अपनी ज़िंदगी में कभी इतनी रफ्तार से नहीं भागो कि दूसरों को तुम्हारा ध्यान खींचने के लिए पत्थर फेंकना पड़ जाए…ऊपर वाला हमारी आत्मा के साथ बुदबुदाता रहता है…हमारे दिल से बात करता है…जब हमारे पास उसे सुनने के लिए वक्त नहीं रहता तो वो किसी पत्थर का सहारा लेता है..अब ये हमारे पर है कि हम उसे सुने या न सुने… स्लॉग चिंतन- अगर आप किसी की खुशियों की इबारत लिखने वाली पेंसिल नहीं बन सकते तो दूसरों के दर्द मिटाने वाले रबर बनने की ही कोशिश कीजिए… Share on FacebookPost on X Read more »
आजकल एक चुटकुला बड़ा चल रहा है- भारत में सेना प्रमुख की उम्र सरकार तय करती है और पाकिस्तान में सरकार की उम्र वहां के सेना प्रमुख तय करते है…पड़ोसी मुल्क... Read more »
एक आदमी रोटी बेलता है, एक आदमी रोटी खाता है, एक तीसरा आदमी भी है, जो न रोटी बेलता है, न रोटी खाता है, वो सिर्फ रोटी से खेलता है, मैं पूछता... Read more »
अख़लाक़ मोहम्मद ख़ान उर्फ़ शहरयार 16 जून 1936-13 फरवरी 2012 Share on FacebookPost on X Read more »
ज़माना बदल गया है… पहले रिश्ते प्यार के लिए होते थे, चीज़ें इस्तेमाल करने के लिए.. अब चीज़ों को प्यार किया जाता है और रिश्तों को इस्तेमाल… ज़िंदगी की... Read more »