किसी शायर ने क्या ख़ूब कहा…
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वो आती है रोज़, मेरी क़ब्र पर,
अपने हमसफ़र के साथ…
कौन कमबख्त कहता है कि,
“दफ़नाने” के बाद “जलाया” नहीं जाता…
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विचित्र ख़बरें…
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आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
कृपया पधारें
चर्चा मंच-701:चर्चाकार-दिलबाग विर्क
दफनाने के बाद तो अधिक जलाया जाता है। दिल की आग के साथ जो मनों लकडियाँ होती हैं उनकी आँच भी तो झेलनी पडती है। लेकिन जलते दोनो हैं दफन होने वाले भी और दफनाने वाले भी। शुभकामनायें।
वाकई बहुत खूब कहा है।
वाह..
बेहतरीन।
क्या बात है…!
वाह..शायर का अंदाज़े बयां काबिले दाद है…एक शायर ने तो कुछ यूँ कहा सुनिए:-
मैं मर गया जिसके लिए ये हाल है उसका
ईंटें चुरा के ले गया मेरे मज़ार से
नीरज
हा हा हा ! और जलने में तकलीफ भी ज्यादा होती है ।
कौन कमबख्त कहता है कि,
"दफ़नाने" के बाद "जलाया" नहीं जाता…
ओये होये …………मार ही डाला
क्या खूब शेर कहा है (जिसने भी कहा है).. मज़ा ही आ गया आज तो..
वाह वाह ..क्या शेर है ..एकदम बब्बर टाइप का.
wah wah, boht khoob sher hai, sayar log bade ache hote hai
yes… मैंने भी सुना है यह शेर॥वाकई बहुत खूब कहा है।समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है।
जलाना जारी आहे।