संसद और मौन…आप कहेंगे या तो मैं हिल गया हूं या संसद की छुट्टी होगी…न तो मैं हिला हूं और न ही संसद की छुट्टी थी…17 साल पुरानी छह दिसंबर 1992 की... Read more »
आज की मेरी पोस्ट निर्मला कपिला जी को समर्पित है…साथ ही ये पोस्ट भारत से दूर परदेस में आशियाना बना चुके सभी भारतवंशियों के लिए भी है…मां से उसका बेटा दूर हो... Read more »
इंसान महंगाई से त्राहि माम-त्राहि माम कर रहा है…लेकिन भगवान की कमाई लगातार बढ़ती जा रही है…सुख-संपत्ति के धाम लगातार फलते-फूलते जा रहे हैं…मान्यता है कि अपनी कमाई से कुछ हिस्सा ईश्वर... Read more »
आज ये मेरी सौवीं पोस्ट है…आज ही छह दिसंबर है…अजब इत्तेफ़ाक़ है…पोस्ट की सेंचुरी है तो कुछ बढ़िया कॉकटेल तो बनता है न बॉस… खट्टा मीठा सब कुछ होगा…स्लॉग ओवर भी होगा…गीत... Read more »
हम तो चले परदेस, हम परदेसी हो गए, छूटा अपना देस हम परदेसी हो गए…आखिर वो कौन सी मजबूरी है जो इंसान को अपनी माटी छोड़कर दूर अजनबियों के बीच ले जाती... Read more »
आते है लोग, जाते है लोग, पानी में जैसे रेले, जाने के बाद, आते हैं याद, गुज़रे हुए वो मेले… यादें मिटा रही है. यादें बना रही है, गाड़ी बुला रही है,... Read more »
चूहे को बड़ा निरीह प्राणी माना जाता है…आप क्या समझते हैं महंगाई की मार हम सिर्फ इंसानों को झेलनी पड़ रही है…चूहे भी हम इंसानों जैसे ही होते हैं…दाल, आटा सब कुछ... Read more »
अलविदा, अलविदा…कितने जानलेवा हैं ये शब्द अलविदा….आप के सफ़र में कोई साथी बन गया हो…रोज़ आपका उससे वास्ता हो…और फिर अचानक वो कह दे, अलविदा…ये शब्द फिर कानों में पिघलते लावे से... Read more »
इंदिरा गांधी…उन्हें चाहने वाले दुर्गा से उनकी तुलना करते हुए शक्ति की प्रतीक मानते रहे हैं…इंदिरा से नफ़रत करने वालों की नज़र में उनसे ज़्यादा अहंकारी, तुनकमिज़ाज़ और पुत्रप्रेम में अच्छे-बुरे की... Read more »
आज बात करता हूं एम जे की…एम जे यानि माइकल जैक्सन की…माइकल जैक्सन को दुनिया को अलविदा कहे पांच महीने बीत चुके हैं…सब जानते हैं कि माइकल जैक्सन ने ड्रग्स ले लेकर... Read more »