के बीमार का हाल अच्छा है…खुशदीप

अच्छे ईसा हो मरीज़ों का ख़याल अच्छा है,  हम मरे जाते हैं तुम कहते हो हाल अच्छा है… उनके देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक, वो समझते हैं के... Read more »

​’सूर्यमाल के सप्तक’…​​खुशदीप

आपने अपने हिंदी ब्लॉग  को एलीट, अभिजात्य, कुलीन, संभ्रात, विद्वत ब्लॉगरों से मान्यता दिलानी है, तो आपको अपने लेखन में आमूल-चूल परिवर्तन  करने होंगे…​सबसे पहले आपको लेखन की इस तरह की शैली... Read more »

हाय राम, कैसे होगा ब्लॉगिंग का उत्थान…खुशदीप​​

आजकल  ब्लॉगिंग  में दूसरों को उपदेश  देने वालों की बाढ़  सी आ गई  है…कोई  मर्यादा का पाठ  पढ़ा रहा है…कोई टिप्पणी विनिमय का शिष्टाचार  सिखा रहा है…कोई  भाषा पर सवाल  कर रहा... Read more »

टैकल पेट्रोल हाइक मक्खन स्टाइल…खुशदीप

सरकार बड़ी समझदार है…उसने पेट्रोल के दामों में साढ़े सात रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी सब सोच-समझ कर की है…सरकार को पता है कि तीन-चार दिन देश भर में हो-हल्ला होगा…कुछ ज़्यादा... Read more »

ब्लॉगिंग उड़ान भरने के लिए तैयार…खुशदीप

. थिंक  पाज़िटिव…बी पाज़िटिव…​   ब्लॉगिंग  उड़ान  भरने के लिए  तैयार… जी हां…हिंदी ब्लॉगिंग  शीघ्र  ही विश्व में उस  मकाम  को प्राप्त  कर लेगी जिसके लिए ये पिछले एक दशक (?) से प्रयासरत  है…बस कान्फिडेंस  होना चाहिए…इसके... Read more »

ये सम्मानों की दुनिया…खुशदीप

ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है, ​​ये ब्लागों, ये आयोजनों, ये सम्मानों की दुनिया… ये भाईचारे की दुश्मन  गुटबाज़ी की दुनिया,​ ​ये नाम  के भूखे रिवाज़ों की दुनिया,​ ​ये... Read more »

आमिर की आंधी से किसकी चांदी…खुशदीप

कितने पावन  हैं लोग  यहां,​ ​मैं नित  नित  सीस  झुकाता हूं, ​भारत  का रहने वाला हूं,  भारत  की बात  बताता हूं…​ ​​ ​वाकई मेरे देश के लोग बहुत भोले हैं…पहले अन्ना की... Read more »

सूखे में आमरस…खुशदीप

बहुत हुई आंख-मिचौली, खेलूंगी मैं रस की होली…​​ ​​ कैटरीना कैफ़ की ये एड  देखकर आपका मन भी आम या आमरस के लिए मचलने लगा है तो ख़बरदार…. ​ ​राज  ठाकरे की... Read more »

कार्टून, संविधान, अंबेडकर, नेहरू, घोंघा…खुशदीप

एनसीईआरटी की 11वीं कक्षा की राजनीति शास्त्र की किताब में संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर का एक कार्टून छपा है…इसे लेकर दलित समुदाय नाराज है… इस कार्टून के जरिए बताया गया है कि... Read more »

कॉल सेंटर टू क्राइम…खुशदीप

बड़े शहरों में कॉल सेंटर बेरोज़गारी को दूर करने का अच्छा ज़रिया बने हुए हैं…माता-पिता को भी लगता है कि बच्चे  पढ़ाई  के साथ  कॉल सेंटर में काम करके जेब खर्च  भी खुद निकाल लेते... Read more »