यहां मिलता है 1 रु. में भरपेट खाना…खुशदीप

कम से कम रुपये में भरपेट खाना कहां खाया जा सकता है, इस पर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है…सारे न्यूज चैनल्स के रिपोर्टर खाने-पीने के ठिकानों पर मारे-मारे फिर रहे... Read more »

हे बयानवीरों…आपके इरादे क्या हैं…खुशदीप

चुनाव से पहले बयानवीर नेताओं के बयानों में तेज़ी आती जा रही है… दो बानगी देखिए… ‘बच्चा-बच्चा राम का, राघव जी के काम का’…दिग्विजय सिंह… ‘कार से कुत्ते का बच्चा भी कुचल... Read more »

कोसिए मत, बोल्ड मेट्रो को सलाम कीजिए…खुशदीप

सब हाथ धोकर पीछे पड़ गए हैं कि दिल्ली मेट्रो के स्टाफ में से किसने जोड़ों के अंतरंग लम्हों की सीसीटीवी फुटेज लीक की…आज एच टी के सिटी पेज पर कई प्रबुद्ध... Read more »

होटल में छुपे कैमरे आप के हित में…खुशदीप

​व्हिस्ल ब्लोअर एडवर्ड स्नोडेन को वेनेजुएला और निकारागुआ अमेरिकी दादागिरी की परवाह किए बिना अपने यहां शरण देने के लिए तैयार हो​ गए हैं…स्नोडेन ने हाल में भंडाफोड़ किया था कि अमेरिकी... Read more »

ब्लॉगिंग के लौहपुरुष कोपभवन में…खुशदीप

बहुत बड़ा लोचा हो गया है…मुझे अभी अभी ब्लॉगिंग के लौहपुरुष सतीश सक्सेना भाई जी ने अपने पर्सनल सेक्रेटरी टीपक मरोड़ा के ज़रिए एक चिट्ठी भिजवाई है… चिट्ठी में सतीश भाई ने... Read more »

मक्खन LAUGHTER HATTRICK…खुशदीप

बडे़ दिन से मक्खन छुट्टी पर था…सोचा कहीं ब्लॉगर बिरादरी मक्खन को भूल ही ना जाए…इसलिए आज मक्खन की ही हैट्रिक… मक्खन रोज़ छत पर कपड़े धोने के लिए बैठता… लेकिन उसी... Read more »

चेहरा ही सब कहता है…

फेकिंग न्यूज़ एक बहुत मज़ेदार वेबसाइट है…उसी में एक सैटायरिकल पोस्ट में बताया गया है कि हमारे सारे मंत्री वयस्क (बायोलॉजिकली) हैं, इसलिए चेहरों पर अपने भाव छुपा लेते हैं…लेकिन अगर बच्चे होते तो उनके... Read more »

अजनबी बन जाएं हम दोनों…खुशदीप

चलो इक बार फिर से, अजनबी बन जाएं हम दोनोंचलो इक बार फिर से… न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखूँ दिलनवाज़ी की,न तुम मेरी तरफ़ देखो गलत अंदाज़ नज़रों से,न मेरे दिल... Read more »

कौन ‘हिटलर-मुसोलिनी’, कौन ‘पोप’…खुशदीप

9 जून को नरेंद्र मोदी की पैन इंडियन भूमिका पर मुहर लगाते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने उन्हें पार्टी की चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बना दिया… 9 जून... Read more »

‘म’ से महाजन, ‘म’ से मोदी…खुशदीप

गोवा में बीजेपी का मंथन देखकर एक साथ बहुत कुछ याद आ रहा है…सबसे पहले याद आई डार्विन की थ्योरी…गलाकाट प्रतिस्पर्धा हमेशा एक ही प्रजाति के सदस्यों के भीतर ज़्यादा होती है…बनिस्बत... Read more »