ग्रेटर नोएडा।
ग्रेटर नोएडा में गुरुवार को एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर में एमआरआई जांच के दौरान छह वर्षीय बच्चे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने सेंटर कर्मचारियों पर लापरवाही और जरूरत से ज्यादा बेहोशी की दवा (सेडेशन) देने का आरोप लगाया है। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश देते हुए संबंधित सेंटर को सील कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, डूंगरपुर गांव निवासी किसान विक्की के छह वर्षीय बेटे को करीब 20 दिन पहले हल्का दौरा पड़ा था। एहतियात के तौर पर डॉक्टरों ने एमआरआई और ईईजी जांच कराने की सलाह दी थी। परिजनों का कहना है कि जांच वाले दिन बच्चा सामान्य स्थिति में था और घर पर खेल रहा था।
पिता ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि एमआरआई के दौरान सेंटर कर्मचारियों ने बच्चे को सेडेशन की अधिक मात्रा दे दी, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। शिकायत के मुताबिक, कर्मचारियों ने अतिरिक्त पैसों की मांग की और कहा कि बच्चे को दोबारा बेहोश करना पड़ेगा। परिजनों के विरोध के बावजूद दूसरी खुराक दी गई। परिवार का दावा है कि उन्होंने एक कर्मचारी को यह कहते सुना कि बच्चे को पहले ही दवा दी जा चुकी थी, जिसके बाद सेंटर में अफरा-तफरी मच गई।
आरोप है कि दूसरी खुराक देने के बाद बच्चे को लगभग आधे घंटे तक अंदर ही रखा गया। जब परिजन अंदर पहुंचे तो बच्चा बेसुध पड़ा था। हालत बिगड़ने पर सेंटर कर्मियों ने उसे दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद परिजनों और स्थानीय किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए गौतमबुद्ध नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. नरेंद्र कुमार ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। जांच पूरी होने तक संबंधित डायग्नोस्टिक सेंटर को सील कर दिया गया है।
पुलिस के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में औपचारिक एफआईआर दर्ज की जाएगी। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
इस घटना ने निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों में सेडेशन और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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