समीर संतरीमंडल शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी…खुशदीप

ब्रेकिंग न्यूज़…ब्रेकिंग न्यूज़़…मेरे पत्रकारिता करियर की सबसे बड़ी और सनसनीखेज़ रिपोर्ट…वो रिपोर्ट जिससे हिंदुस्तान की तस्वीर पलटने वाली है…कल दिल्ली में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई…बैठक में महंगाई और बजट में एक्साइज ड्यूटी बढ़ाए जाने से जनता की नाराजगी से निपटने पर खास तौर पर विचार हुआ…घंटों की मगज़मारी के बाद निष्कर्ष यही निकला कि जनता अब जाग चुकी है, इसे और उल्लू नहीं बनाया जा सकता….फिर किया तो किया क्या जाए…क्या विरोधी दलों को तश्तरी पर सजा कर सत्ता सौंप दी जाए या नये चुनाव का जोखिम लिया जाए…हर्गिज नहीं…फिर क्या…क्यों न इस बार देश में राष्ट्रीय सरकार के विकल्प को आजमाया जाए…एक बार ये भी कर के देख लिया जाए…लेकिन राष्ट्रीय सरकार का मुखिया किसे बनाया जाए…नेताओं से लोगों का भरोसा उठ चुका है इसलिए नेता की जगह किसी दूसरे को ही देश की बागडोर सौंपी जाए…जो हरदिलअज़ीज़ हो…बजट के लिए पैसे की भी कमी न आने दे…और जनता में हर किसी को खुश रख सके…

ये सब चल ही रहा था कि भूतल-परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग विकास मंत्री कमलनाथ ने कहा कि मैं एक नाम सुझा सकता हूं…जो देश-विदेश में बहुत पॉपुलर है…अपनी बात (टिप्पणी) से ही किसी का भी जी खुश कर सकता है…उसे दुनिया भर में दौरों के लिए सरकारी विमान की भी ज़रूरत नहीं…उसके पास अपनी उड़नतश्तरी है जिस पर बैठकर वो शख्स सर्र से कहीं भी पहुंच सकता है…कमलनाथ ने उस शख्स का नाम लिया- समीर लाल समीर…ये सुनकर मेरा दिल बल्लियों उछलने लगा…फौरन हॉटलाइन पर समीर जी से संपर्क किया गया…समीर जी ने सारी बात सुनी और फिर नम्रता से कहा कि अनूप शुक्ल मेरे से वरिष्ठ हैं, पहले उन्हें ये ऑफर की जाए…दिल्ली से अनूप जी के तार जोड़े गए…अनूप जी ने प्रस्ताव सुनकर कहा कि वो लोकनायक जयप्रकाश नारायण की परंपरा वाले हैं, इसलिए खुद सत्ता संभालने में नहीं बल्कि खुद के किंगमेकर रहने में विश्वास रखते हैं…इसलिए समीर जी को ही ये ज़िम्मेदारी सौंपी जाए…अनूप जी से ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद समीर जी तैयार हो गए…लेकिन उन्होंने एक शर्त और रख दी…समीर जी ने कहा कि वो मंत्री जैसे किसी पद में विश्वास नहीं रखते…समाजवाद को मानते हैं…इसलिए जहां जहां भी मंत्री शब्द इस्तेमाल होता है उसे बदल कर संतरी कर दिया जाए….जैसे समीर जी ने खुद अपने पद के लिए प्रधानसंतरी शब्द सुझाया…

मरती क्या न करती…सरकार ने समीर जी की सारी बात मान ली…ये सब चल ही रहा था कि रचना जी को गुप्तचर सूत्रों से पता चल गया कि नारी की जगह पुरुष को प्रधानसंतरी बनाया जा रहा है…और उन्हें सिर्फ महिला विकास संतरालय देकर ही टरकाया जा रहा है…उन्होंने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए हेग जाकर वर्ल्ड कोर्ट में शिकायत करने की धमकी दे डाली…बड़ी मुश्किल से उन्हें उपप्रधानसंतरी के पद से मनाया जा सका…इस बीच अदा जी टंकी पर चढ़ गईं…उन्हें महिला विकास का महकमा दिए जाने के बाद ही शांत किया जा सका…

समीर जी के प्रधानसंतरी बनने की बात सुनकर मैने सोचा चलो अब तो मेरे भी दिन फिर जाएंगे…पूरे छह महीने हो गए गुरुदेव-गुरुदेव करते…जीभ तक घिस गई मक्खन लगाते-लगाते…कोई मलाईदार महकमा तो मिल ही जाएगा…लेकिन तभी मेरी आंखों के आगे डॉ अरविंद मिश्रा का रुआबदार चेहरा घूरता हुआ महसूस होने लगा…जैसे पूछ रहा हो…हो गए सब उसूल-आदर्श हवा…संतरी पद की सोचते ही जीभ लपलपाने लगी…अब करूं तो करूं क्या…संतरी पद लेता हूं तो रुसवाई…नहीं लेता तो अपना भारी नुकसान…मैंने इस मुद्दे को गुरुदेव पर ही छोड़ा…गुरुदेव ने भी ऐसा तोड़ निकाला कि सांप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी….मुझे बिना विभाग का संतरी बना दिया गया…

अब देखिए बाकी संतरालयों के प्रभारियों की सूची…

अरविन्द मिश्रा – मानव संसाधन विकास, इस राइडर के साथ ऐसी कोई एडल्ट पोस्ट नहीं लिखेंगे जिससे ब्लॉगर बच्चे बिगड़ें

अजय कुमार झा – जन संपर्क

विवेक सिंह –खोया-पाया विभाग (गुमशुदगी)

डॉ टी एस दराल – स्वास्थ्य

मसिजीवी– शोध एवं अनुसंधान

ताऊ रामपुरिया – पशुधन विकास

मिथिलेश दुबे– बाल विकास

शहरोज- भाषा समन्वय

ज्ञानदत्त पाण्डेय –रेलवे

दिनेश राय द्विवेदी – न्याय एवं विधि

सुमन – नाइस नाम से नया विभाग

अविनाश वाचस्पति – घेटो विकास

डॉ कविता वाचकनवी : संस्कृति

महफूज़ अली – किशोर सुधार गृह

अनिल पुसद्कर– जलपान व्यवस्था (विशेष तौर पर समोसा निर्माण)

आशा जोगलेकर– पर्यटन

सरवत जमाल – समीक्षा

राज भाटिया – प्रवासी भारतीय

विनीत कुमार – प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष

राजीव तनेजा – फोटो निदेशालय

संगीता पुरी- मौसम पूर्वानुमान

सतीश सक्सेना – निर्माण

डॉ.अनुराग- साहित्य और विवेचना

रश्मि रविजा– क्रिएटिविटी

शिखा वार्ष्णेय–  उच्चायुक्त, भारतीय हाईकमीशन, लंदन

वाणी- पत्नी शिकायत प्रकोष्ठ

सलीम- ह्दय परिवर्तन रोग विभाग

रुप चंद्र शास्त्री मयंक-  पेटेंट एवं कॉपीराइट विभाग

ललित जी- ब्लॉगर बच्चों को डराऊ विभाग

निर्मला कपिला- ममता मंत्रालय

जी के अवधिया– वृद्ध कल्याण

हिमांशु– गंगा स्वच्छता विभाग

दीपक मशाल– बुंदेलखंड विकास

गौतम राजरिशी– डिफेंस

बीएस पाबला– पंगा विभाग

लावण्या जी– समृद्धि, धरोहर, कला खज़ाना विभाग

गिरीश चंद्र बिल्लौरे मुकुल– टेप एवं रिकॉर्ड विभाग

बवाल– टोपी पहनाओ विभाग

दर्पण– कांच निर्माण

गोदियाल जी– सामाजिक सद्भाव

महेंद्र मिश्र– पुर्नवास विभाग

मो सम कौन (संजय अनेजा) : डॉन विभाग (अरे दीवानो, मुझे पहचानो, कहां से आया मैं हूं कौन)

विवेक रस्तोगी– फास्ट फूड कंट्रोल विभाग

रानी विशाल– नवीनीकरण विभाग

शोभना चौधरी– युवा कल्याण

कुलदीप हैप्पी– ब्लॉगवुड विकास

श्रद्धा जैन– बिजली (कभी कभी ही ब्लॉग पर चमकती हैं)

अल्पना वर्मा– सांग एंड ड्रामा निदेशालय

बबली– नव साहित्य सृजन

शेफाली पांडेय– पद्म पुरस्कार वितरण विभाग

सतीश पंचम– देवदासी उद्धार

धीरू सिंह– कुपोषण नियंत्रण

अजित वडनेरकर– देश के सवा अरब नागरिकों की पहचान के लिए अलग-अलग शब्द देने का विभाग

पंडित वत्स– हवन व अनुष्ठान संतरालय

शरद कोकास– पुरातत्व संतरालय

जाकिर अली रजनीश– सम्मान संतरालय

रवींद्र प्रभात– ईमानदारी संतरालय

सुरेश चिपलूनकर– पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त

हरकीरत हीर– दर्द निवारण संतरालय

मनोज कुमार– न कोऊ से दोस्ती, न कोऊ से बैर संतरालय

डॉ अजित गुप्ता– स्पीकर, ब्लॉग सभा

एम वर्मा– प्यार बांटू संतरालय

विवेक रंजन श्रीवास्तव– टिप्पणी निगरानी विभाग

नीरज गोस्वामी– बिना विभाग के वरिष्ठ संतरी

प्रवीण त्रिवेदी– प्राइमरी विभाग

गिरिजेश राव –वर्तनी सुधार संतरालय ( क ख ग सिखाने पर विशेष ज़ोर)

वंदना– आतिथ्य सत्कार संतरालय

हरि शर्मा- वाणिज्य संतरालय

अलबेला खत्री– मनोरंजन और शालीनता विकास संतरालय

पता चला है कि सागर, यशवंत मेहता सन्नी, अंतर सोहेल, मयंक, रोहित (बोले तो बिंदास), पारुल, फौजिया, अमरेंद्र त्रिपाठी, प्रवीण पथिक, नीशू तिवारी, कनिष्क कश्यप,पकंज मिश्रा, सेमलानी जैसे युवा साथियों ने संतरीमंडल में जगह न मिलने पर बग़ावती तेवर दिखाने के संकेत दिए हैं…उन्हें पहले फील्ड में कुछ साल बिताने के बाद संतरी पद मांगने की सलाह दी गई है…सुना है कि ये सब अपना अलग घेटो बनाने पर विचार कर रहे हैं…

आखिर में सबसे अहम बात…ये सूची आदि ब्लॉगर डॉ अमर कुमार जी का अनुमोदन मिलने के बाद ही अमल में लाई जा सकेगी…

ये सब चल ही रहा था कि किसी ने मेरे ऊपर होली के रंगों से भरी बाल्टी उढ़ेल कर नींद से उठा दिया…

Khushdeep Sehgal
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