कुछ लोग कामयाब होने के बस ख्वाब बुनते हैं… कुछ नींद से जागते हैं और दिन रात एक कर देते हैं… फिर एक दिन कामयाबी खुद उनके कदम चूमती है… स्लॉग... Read more »
एक बटा दो, दो बटे चार, छोटी छोटी बातों में बंट गया संसार… नहीं नहीं, मैं बीमारी का झटका सह कर इतना भी मक्खन नहीं हुआ कि बाबाओं की तरह आपको उपदेश... Read more »
ये पोस्ट तो नहीं है, लेकिन जर्मनी का लैपटॉप का ऐसा कॉन्सेप्ट है कि आपको भी देख कर मज़ा आ जाएगा..इसलिए आपको दिखाने के लोभ से खुद को बचा नहीं पा रहा... Read more »
ये उन दिनों की बात है जब हम मेरठ के गवर्मेंट इंटर कॉलेज के होनहार (?) छात्र हुआ करते थे…पढ़ा क्या करते थे, एक जैसी सोच वाले हम कुछ मस्तमौलाओं ने चांडाल... Read more »
सबसे पहले तो मैं आभारी हूं आप सब का… जी के अवधिया, एम वर्मा, विवेक रस्तोगी, ललित शर्मा, संगीता स्वरूप, सुरेश चिपलूनकर, काजल कुमार, सतीश सक्सेना, अविनाश वाचस्पति, अजित गुप्ता, मो सम... Read more »
नहीं, नहीं मैं कहीं टंकी-वंकी पर चढ़ने नहीं जा रहा…क्योंकि आप उतरने को कहोगे तो शोले के सांभा की तरह मेरे घुटने दर्द करेंगे…आखिर उम्र का भी तकाजा है…इसलिए अपने लिए बीच... Read more »
ये आप सब का प्यार ही था जो मुझे पहली कहानी…न हिन्दू, न मुसलमान, वो बस इनसान…लिखने का हौसला मिला था…आज फिर उसी दिशा में एक और प्रयास कर रहा हूं…पिंजरा शीर्षक... Read more »
ये भी एक दौर है, वो भी एक दौर था, आज जहां है धोनी, वहां कल कोई और था… पहले जब कभी जीतता था भारत, देश रहता होली-दीवाली से सराबोर था… आज... Read more »
कयामत के बाद धरती पर कोई शादीशुदा व्यक्ति जीवित नहीं बचा…सब स्वर्ग में जाने की इच्छा लिए इंतज़ार करने लगे…तभी ईश्वर प्रकट हुए…उन्होंने आते ही कहा कि मैं चाहता हूं जितने भी... Read more »
ईश्वर आपके लिए क्या करे ?…यही था वो टॉपिक जिस पर बुज़ुर्गो के कल्याण के लिए काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने शहर में रहने वाले बुज़ुर्गों से उनके... Read more »