खुशदीप सहगल यानि मैं…इनसान हूं…सुख में खुश और दुख में दुखी भी होता हूं…शांत रहने की कोशिश करता हूं लेकिन कभी-कभार गुस्सा भी आ जाता है…पंजाबी ख़ून का असर है या कुछ... Read more »
क्या कसूर सिर्फ बेटे-बहुओं का ही होता है…माता-पिता या बुज़ुर्ग क्या कभी गलत नहीं होते…युवा पीढ़ी के इस सवाल में भी दम है…हम सिर्फ एक नज़रिए से ही देखेंगे तो न्याय नहीं... Read more »
संयुक्त परिवार को लेकर कल मेरी पोस्ट पर शिखा वार्ष्णेय जी ने बड़ा जायज़ सवाल उठाया था…बुज़ुर्ग हमेशा सही हों, ऐसा भी नहीं होता…न्यूक्लियर फैमिली का प्रचलन बढ़ रहा है तो इसके... Read more »
कल बात की थी मां के दूध की…एक देश में दो देश होने की…भारत की, इंडिया की…आज बात हाईराइज़ बिल्डिंग्स के दड़बेनुमा वन बीएचके, टू बीएचके फ्लैटों में रहने वाले मॉडर्न कपल्स... Read more »
कल मेरी पोस्ट पर शेफ़ाली पांडे की टिप्पणी ने मुझे अंदर तक हिला कर रख दिया…न जाने ऐसी कितनी माताएं होंगी जिन्हें रोज़ शेफ़ाली बहना जैसे हालात से गुज़रना होता होगा…कलेजे के... Read more »
मां का दूध पिया है तो सामने आ… छठी का दूध याद न दिला दिया तो मेरा नाम नहीं… दूध का कर्ज़ कैसे चुकाऊंगा… ये सारे डॉयलॉग आपने कभी बोले नहीं तो... Read more »
एक शराबी टुन्न होकर घर लौट रहा था…रास्ते में मंदिर के बाहर एक पुजारी दिखाई दिए… शराबी ठहरा शराबी, पुजारी से ही पंगा लेने को तैयार…पूछ बैठा…सबसे बड़ा कौन ? पुजारी ने... Read more »
कल मैंने काफ़ी के कप पेश किए थे…पता नहीं किसी सज्जन को काफ़ी का टेस्ट इतना कड़वा लगा कि उन्हें बदहजमी हो गई…शायद उस सज्जन ने ठान लिया था कि मुझे कॉफी... Read more »
एमबीए छात्रों का एक बैच पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने अपने करियर में अच्छी तरह सैटल हो गया…एमबीए कॉलेज में फंक्शन के दौरान उस बैच के सारे छात्रों को न्योता दिया... Read more »
मरहूम शेक्सपीयर चचा क्या खूब कह गए हैं…नाम में क्या रखा है…वाकई नाम में क्या रखा है…आइडिया का एक एड आता है जिसमें इनसानों को नाम से नहीं बस नंबर से याद... Read more »