पत्नीश्री, मैं और ट्रेड फेयर का डिप्लोमेटिक टूर…खुशदीप

पोस्ट पर कुछ लिखूं…उससे पहले पिछली पोस्ट पर आई निर्मला कपिला जी की ये टिप्पणी… अच्छा तो अब डिप्लोमेसी भी सीख गये हो? लेकिन बता दूँ मेरी बहू से डिप्लोमेसी नही करना।... Read more »

भारत लौटे राम, ‘बदमाश’ ब्लॉगर नहीं पहुंचे…खुशदीप

टाइटल पढ़कर चकराइए मत…सब बताता हूं…ज़रा सब्र तो रखिए…प्रवासी परिंदें इसी मौसम में सबसे ज़्यादा भारत का रुख करते हैं…वो जहां डेरा डालते हैं, वहां की बहार देखते ही बनती है…आबोदाना इनसान... Read more »

ये है दिल्ली मेरी जान…खुशदीप

ए दिल मुश्किल है जीना यहां,  ज़रा बच के, ज़रा हट के…ये है दिल्ली मेरी जान… गाने में बेशक मुंबई था लेकिन आज देश की राजधानी में लड़कियों या महिलाओं को यही... Read more »

रूल्स जो भारतीय फॉलो करते हैं…खुशदीप

मैं चाहे ये करूं, मैं चाहे वो करूं…मेरी मर्ज़ी…क्या हम भारतीयों के अंदर कोई आइडेंटिकल और टिपीकल जींस पाए जाते हैं…पृथ्वी सूरज का चक्कर काटना छोड़ सकती है लेकिन मज़ाल है कि... Read more »

घर के मुखिया का सिर्फ ईमानदार होना काफ़ी नहीं…खुशदीप

कहीं ब्लॉग पर ही पढ़ा था…गौरमिन्ट (गवर्मेंट का देशज) वो होती है जो मिनट-मिनट पर गौर करे…प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ईमानदारी पर कोई सवाल नहीं उठा सकता…उनके राजनीतिक विरोधी भी नहीं…लेकिन घर... Read more »

आज बस भ्रष्टाचार के फंडे की दो फुलझड़ियां…खुशदीप

मैथ्स के टीचर ने छात्र से सवाल पूछा- अगर एक दीवार को बनवाने में दस हज़ार रुपये का खर्च आता है तो दो दीवार बनवाने में कितना खर्च आएगा… छात्र…दस करोड़ रुपये... Read more »

तस्वीरें बताती है कल क्या था आलम…रोहतक रिपोर्टिंग…खुशदीप

अजय कुमार झा, मैं और शाहनवाज़ सिद्दीकी, मौज के साथ रिपोर्टिंग की ज़िम्मेदारी का भी एहसास निर्मला कपिला जी और संगीता पुरी जी का खिलखिलाना यानि महफिल पर बहार का आना मां-बेटे... Read more »

तिलयार चिल यार…रोहतक लाइव रिपोर्टिंग कंटीन्यू…खुशदीप

ललित शर्मा जी की बात को ध्यान से सुनतीं संजू तनेजा (चेहरा नहीं दिख रहा), संगीता पुरी जी, निर्मला कपिला जी, डॉ अरुणा कपूर जी, श्रीमती अंजू सोहेल (अंतर सोहेल की धर्मपत्नी)... Read more »

पॉलिटिकली करेक्ट दिखने की मजबूरी…खुशदीप

कल माहौल हल्का करने के लिए महफूज़ पर पोस्ट लिखी…सब ने उसे अपने-अपने नज़रिए से लिया…किसी ने फिज़ूल पोस्ट माना…किसी ने महफूज़ का महिमामंडन…डांट भी मिली कि मैं महफूज़ की बेज़ा हरकतों... Read more »

महफूज़ के अंदर भी है रजनीकांत…खुशदीप

कभी सुख, कभी दुख, यही ज़िंदगी है, ये पतझड़ का मौसम, घड़ी दो घड़ी है, नए फूल कल फिर, डगर में खिलेंगे, उदासी भरे ये दिन, कभी तो हटेंगे… कभी धूप तो... Read more »