सावधान! Ghibli चुरा रहा है आपका चेहरा? 

अरबों डॉलर के बाजार में आपका चेहरा बेच रहीं AI कंपनियां

5.73 अरब डॉलर तक पहुंचा Face Recognition Technology (FRT) का बाज़ार

आप खुद ही अपनी और परिवार की फोटो शेयर कर मोल ले रहे हैं ख़तरा!

-खुशदीप सहगल

नई दिल्ली, (01 मार्च, 2025)|

ये घिबली घिबली क्या है घिबली घिबली…जिसे देखो सोशल मीडिया पर इन दिनो अपनी घिबली स्टाइल तस्वीरें बनाने में जुटा है. ओपन एआई के चैट जीपीटी से बनाई जाने वाली इन घिबली तस्वीरों की फेसबुक, इंस्टाग्राम या फिर एक्स, हर जगह भरमार देखी जा सकती है. लोग घिबली स्टाइल में तस्वीर बनवाने के लिए AI के साथ ना सिर्फ अपनी फोटो शेयर कर रहे हैं, बल्कि अपने परिवार, यहां तक कि छोटे-छोटे बच्चों की भी तस्वीरें शेयर कर रहे हैं. लेकिन, क्या भेड़चाल में देखा-देखी करने वाले लोग जानते हैं कि ऐसा कर वो क्या खतरा मोल ले रहे हैं.  वो ना सिर्फ अपनी तस्वीरों का डेटा AI कंपनियों के साथ शेयर कर रहे हैं, बल्कि अनजाने में ही वह अपना फेशियल रिकॉग्निशन यानि चेहरे की पहचान भी उन्हें सौंप रहे हैं.

घिबली स्टाइल आर्टवर्क से जुड़े हर पहलू के बारे में देशनामा आपको इस स्टोरी में बताने जा रहा है.

घिबली ट्रेंड के ख़तरे पर बात करने से पहले आपको बताते हैं कि ये घिबली आर्ट एनिमेशन के नाम से जानी जाने वाली ये तस्वीरें आख़िर बनाई कैसे जा सकती हैं और इस एनिमेशन का क्रिएटर कौन शख्स है. इन तस्वीरों को लोग ओपन एआई के चैट जीपीटी 4.0 वर्शन से बना रहे हैं. इस वर्शन के लिए जेब से 20 डॉलर यानि करीब 17 सौ रुपए हर महीने खर्च करने पड़ते हैं. लेकिन एक ट्रिक से इन घिबली तस्वीरों को मुफ्त भी बनाया जा सकता है. इसके लिए आपको एक्स प्लेटफॉर्म यानि ट्विटर पर जाना है, वहां ग्रोक एआई पर जाना है, वहां अपनी इमेज अपलोड कर दो, फिर आपको ये प्रॉम्पट लिखना है- Turn this into ghibli art…बस फिर आपका घिबली एनिमेशन पलक झपकते ही तैयार हो जाएगा.

घिबली एनिमेशन का जन्मदाता कौन?

आइए आपको अब बताते हैं कि घिबली आर्ट एनिमेशन के पीछे किस शख्स का दिमाग है. ये है जापान के घिबली स्टूडियो के फाउंडर और एनिमेटर हयाओ मियाज़ाकी. 1941 में टोक्यो में जन्मे मियाज़ाकी को किशोर अवस्था में जापानी कॉमिक्स और ग्राफिक नॉवल्स पढ़ने का बहुत शौक था. यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स और पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई पूरी करने के बाद मियाज़ाकी ने 1963 में एक एनिमेटर के तौर पर अपना करियर शुरू किया. मियाज़ाकी ने 1985 में घिबली स्टूडियो की स्थापना की.

लेकिन यहां ये बताना ज़रूरी है कि घिबली स्टूडियो में सभी एनिमेशन हाथ से बनाए जाते हैं और इसके लिए किसी भी तरह की डिजिटल मदद नहीं ली जाती. मियाज़ाकी खुद भी एआई जनरेटेड आर्ट के हक़ में नहीं रहे हैं और हमेशा कहते रहे हैं कि एक एनिमेटर का औज़ार सिर्फ पेंसिल होता है.  मियाज़ाकी ने AI जनरेटेड आर्ट को लेकर कहा था, “मैं पूरी तरह से निराश हूं. मैं इस तकनीक को अपने काम में कभी शामिल नहीं करना चाहूंगा. मेरा पक्का मानना है कि यह जीवन का अपमान है. मुझे लगता है कि हम समय के अंत के करीब हैं. हम मनुष्य खुद पर विश्वास खो रहे हैं.” घिबली का ये भी मानना है कि आर्थिक विकास के नाम पर इंसान कुदरत को तबाह करते जा रहा है, जो एक दिन उसके खुद के तबाह होने की वजह बनेगा.”

आइए अब आपको बताते हैं कि घिबली आर्ट एनिमेशन के जिस ट्रेंड ने सोशल मीडिया को जकड़ लिया है, उसके ख़तरे क्या क्या हैं. ऐसा नहीं है कि हम सिर्फ घिबली की वजह से ही अपना फेशियल रिकॉग्निशन यानि चेहरे की पहचान एआई कंपनियों को सौंप रहे हैं. बल्कि हम दूसरे तरीकों से भी रोजाना AI कंपनियों को अपनी फोटो देते हैं. चाहे वह फोन अनलॉक करने के लिए हो, सोशल मीडिया पर टैग करने के लिए या किसी सर्विस का इस्तेमाल करने के लिए.

इसे ऐसे समझिए कि जब हम सोशल मीडिया पर फोटो डालते हैं या ऐप्स को कैमरा एक्सेस देते हैं, तो हम अक्सर इसके खतरे को नजरअंदाज कर देते हैं. इसका परिणाम ये होता है कि AI कंपनियां हमारे चेहरे के यूनिक डाइमेंशन्स को स्कैन करके स्टोर कर लेती हैं. ये डेटा पासवर्ड या क्रेडिट कार्ड नंबर से भी ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि उन्हें तो आप बदल सकते हैं, लेकिन अगर आपका चेहरा चोरी हो जाए तो आप उसे नहीं बदल सकते.

बता दें कि कुछ अर्सा पहले क्लीयर व्यू ए आई कंट्रोवर्सी हो चुकी है जिसमें आरोप लगे थे कि कंपनी ने बिना इजाजत सोशल मीडिया, न्यूज साइट्स और पब्लिक रिकॉर्ड्स से 3 बिलियन फोटोज चुराकर एक डेटाबेस बनाया और इसे प्राइवेट कंपनियों को बेच दिया. इसके अलावा, मई 2024 में ऑस्ट्रेलियाई कंपनी Outabox का डेटा लीक हुआ, जिसमें 1.05 मिलियन लोगों के फेशियल स्कैन, ड्राइविंग लाइसेंस और पते चोरी हो गए. ये डेटा ‘Have I Been Outaboxed’ नामक साइट पर डाल दिया गया. पीड़ितों ने गलत पहचान, परेशानी और आइडेंटिटी थेफ्ट की शिकायत की. यहां तक कि दुकानों में चोरी रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाले फेशियल रिकॉगनिश्न टेक्नोलॉजी यानि FRT सिस्टम भी हैकर्स के निशाने पर हैं. एक बार चोरी होने के बाद ये डेटा ब्लैक मार्केट में बिकता है, जिससे सिंथेटिक आइडेंटिटी फ्रॉड या डीपफेक बनाने जैसे स्कैम होते हैं.

कौन कमा रहा है आपके चेहरे से पैसा?

Statista की रिपोर्ट के अनुसार, फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी (Facial Recognition Technology, FRT) का बाजार 2025 में 5.73 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है और 2031 तक इसके 14.55 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. मेटा और गूगल जैसी कंपनियों पर आरोप लगते हैं कि वह यूजर्स की फोटोज से अपने AI मॉडल्स को ट्रेन करती हैं, लेकिन ये जानकारी वे शेयर नहीं करतीं.

आप को अगर इस खतरे से बचना है तो सबसे पहले ये घिबली-घिबली बंद कीजिए. इसके अलावा, सोशल मीडिया पर हाई-रिजॉल्यूशन फोटोज अपलोड करने से बचिए. फेस अनलॉक के बजाय पिन या पासवर्ड का इस्तेमाल करिए. इसके अलावा, सरकार और कंपनियों पर दबाव बनाया जाना चाहिए कि वह बताएं कि आपका बायोमेट्रिक डेटा कैसे इस्तेमाल हो रहा है. हालांकि, ये सिर्फ अस्थायी उपाय साबित होंगे. असली बदलाव तभी आएगा जब सरकारें Facial Recognition Technology के गैर-कानूनी इस्तेमाल पर रोक लगाएंगी और AI पर लगाम लगाने के लिए कड़े नियम बनाएंगी.

आप खुद ही एक काम करके देखिए, चैटजीपीटी पर सवाल कीजिए क्या घिबली आर्ट जेनेरेटर पर अपने निजी फोटो डालना सुरक्षित है तो जवाब मिलेगा- नहीं, किसी भी एआई टूल पर निजी फोटो डालना सेफ नहीं है अगर आप उसकी प्रिवेसी पॉलिसीज और डेटा हैंडलिंग के तरीकों को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है.

बहरहाल, हम भारतीयों के साथ एक दिक्कत है कि हमें हर चीज हल्के में लेने की आदत है. कोई भी ट्रेंड शुरू होता है तो हम बिना उसके ख़तरों को जाने उसमें शिरकत करना शुरू कर देते हैं. किस लिए सिर्फ इस पल भर के आनंद के लिए देंखे हमारी तस्वीर किसी ओपन एआई जेनेरेटर के ज़रिए कैसे दिखती है और फिर हम उसे सोशल मीडिया पर शेयर करने से भी बाज़ नहीं आते. बिना ये जाने कि हम अपने ही हाथों अपना फेशियल रिक्गानिशन डेटा फ्री में एआई कंपनियों को सौंप रहे हैं.

इस स्टोरी का वीडियो यहां देखें-

 

 

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