जहां मैं हूं, वहां कल कोई और था…खुशदीप

 आज जहां मैं हूं, वहां कल  कोई और था, ​ ​ये भी एक  दौर है, वो भी एक  दौर था…​ साठ  के दशक  के आखिर और सत्तर के दशक  के शुरू में... Read more »

मां का ‘तबेला’…खुशदीप

दो दिन  पहले सुबह  अखबार  पढ़  रहा था…हिंदी के अखबार  अमर  उजाला में मदर्स  डे (13 मई) का विज्ञापन  देखा…फिर  साथ  ही  मेल  टूडे में इस  ख़बर  पर  नज़र गई…‘Caring’ son keeps... Read more »

बिना शब्द की पोस्ट…खुशदीप

इसे  देखें, आप हिल जाएंगे Read more »

दिल्ली की टैगलाइन बनाओ, 50 हज़ार जीतो…खुशदीप ​​

कभी किसी जगह  के साथ  उसकी टैगलाइन  इतनी  रच-बस  जाती  हैं कि उसकी पहचान ही बन जाती हैं..जैसे कि केरल  के लिए  ” God’s own country” ...आजकल  दिल्ली के लिए भी उसके पूरे मिज़ाज... Read more »

बकौल जस्टिस काटजू 90 % भारतीय ‘मक्खन’…खुशदीप​

​ भारत में हर 10 में  से  9 भारतीय  ‘मूर्ख’  हैं…यानि ‘मक्खन’ हैं…जैसे ठंडा मतलब  कोका-कोका...ऐसे ही ‘मूर्ख’  मतलब  ‘मक्खन’...नब्बे फीसदी ​भारतीयों  को ‘मूर्ख’ और कोई नहीं सुप्रीम  कोर्ट के रिटायर्ड जज और... Read more »

मक्खन इज़ बैक…खुशदीप​

हिंदी ब्लागिंग  में इन दिनों मुझे खालीपन और  भारीपन  दोनों ही महसूस  हो रहा है…खालीपन  इसलिए  कि  मेरे  पसंद  के कुछ ब्लागरों ​ने लिखना बहुत  कम  कर  दिया है…और भारीपन  किसलिए…ये बताने... Read more »

अस्सी साल पहले का जयपुर देखिए…खुशदीप

नोस्टेलजिया कहिए या कुछ और मुझे बीते दौर के फोटोग्राफ बहुत आकर्षित करते हैं…और अगर पुराने वक्त को दर्शाती कोई मूविंग फिल्म  मिल जाए तो कहना ही क्या…ऐसी ही एक फिल्म आपसे... Read more »

कोका-कोला की झप्पी…खुशदीप

​​ मुन्ना भाई  एमबीबीएस  में संजय  दत्त  की जादू की झप्पी बड़ी मशहूर  हुई  थी…लेकिन  आज  मैं आपको दूसरी झप्पी के बारे में बताने जा रहा हूं…इसमें आपको बस  एक  वेंडिंग  मशीन... Read more »

क्यों कहते हो फिर बेटियों को लक्ष्मी…खुशदीप

कब बदलेगी संस्कारवान होने का दावा करने वाले इस देश की सोच ….. बेबी फलक ने दिल्ली के एम्स में15 मार्च को दम तोड़ा, दो साल की फलक  को 18 जनवरी  को... Read more »

बस यही देखना बाकी था…खुशदीप

आजकल टीवी पर एक एड दिखाया जा रहा है…बस इसी की कसर बाकी रह गई थी…पहले आप भी इस एड को देख लीजिए… अब एचटी सिटी के आज के अंक का यह लेख... Read more »