राजनीति को नई दिशा-परिभाषा देता युवा… मूलतः प्रकाशित- नई दुनिया-जागरण आई नेक्स्ट, 9 अप्रैल 2014 यंगिस्तान जाग चुका है। अब उसे सिर्फ ’भविष्य का भारत” कह कर ही टरकाया नहीं जा सकता।... Read more »
नमो खिचड़ी, रागा चॉकलेट, केजरी चना… अरे ओ सांभा, ये रामगढ़ वाले कौन सी चक्की का आटा खाते हैं रे…लेकिन आज सवाल ये है कि हमारे देश की पॉलिटिकल पार्टियों के नेता... Read more »
मुस्लिम वोट बैंक क्या हक़ीक़त है या सिर्फ़ एक भ्रम, इस मुद्दे पर आज मेरा एक लेख अमर उजाला कॉम्पैक्ट में छपा है। इस लेख को इस लिंक पर जाकर पढ़ा जा... Read more »
(खुशबतिया की तीसरी कड़ी आपके लिए हाज़िर है, मेरे इस प्रयास पर अपनी राय ज़रूर दीजिएगा) मजबूरी का नाम… भारत की राजनीति ‘नारा-प्रधान’ है। सियासी दल हों या इनके शीर्ष नेता सभी... Read more »
पति, पत्नी और ‘वो’… चुनावी ख़बरों की बमबारी…पतियों की मगज़मारी…पत्नियों की दुश्वारी…नेताओं की ज़ुबानी जंग ज़्यादा दिलचस्प या सास-बहू सीरियल्स का मेलोड्रामा…ऐसा ही ऑफबीट पढ़ सकते हैं आप वेबदुनिया पोर्टल के इस... Read more »
(वादे के मुताबिक खुशवंत सिंह के कॉलम की प्रेरणा से खुशबतिया का दूसरा संस्करण आपकी पेश-ए-नज़र है, अपनी राय से ज़रूर अवगत कराइएगा।) अटल और मोदी का फ़र्क़… बीजेपी की ओर से... Read more »
(खुशवंत सिंह का मैं हमेशा बहुत बड़ा मुरीद रहा हूं…खुद को बड़ा सौभाग्यशाली समझता हूं कि मेरे नाम भी उनकी तरह खुश से ही शुरू होता है…उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए मैंने... Read more »
लेखन की एक खास शैली है…बेबाकी से अपनी बात सच सरासर सच कहना…ठेठ और अक्खड़ स्टाइल में…ये लेखन सीधे दिल से निकला होता है, सोलह आने खरा होता है, इसलिए गहरी मार... Read more »
ये 11 मार्च बड़ी खास थी…इस तारीख़ की शाम समर्पित थी मेरे हीरो को…वो शख्स जिसे मैंने ज़िंदगी में कभी देखा नहीं…लेकिन उसकी शख्सीयत के बारे में मैंने जितना सुना, वो उतना... Read more »
हर हाल में खुशदीप हूं, इसलिए आज आप से खुश रहने का मंत्र साझा करना चाहता हूं…ये सच है कि ज़िंदगी हर कदम इक नई जंग है…अब ये हम पर निर्भर करता... Read more »