हम हिंदुस्तानी आतंकवादी क्यों नहीं बन सकते…

कल आतंक पर व्यंग्य पोस्ट किया था…लेकिन फिर एक सवाल भी जेहन में आया कि हिंदुस्तानी आला दर्ज़े के आतंकवादी क्यों नहीं बन सकते...ठीक वैसे ही जैसे अमेरिका आजकल अफगानिस्तान में बैड... Read more »

ब्लॉगगढ़ में आ गया गब्बर का बाप…खुशदीप

गब्बर… अरे ओ सांबा…ज़रा देख तो सरकार हमार लई कौन सा नया पोस्टरवा लगाए रे ब्लॉगगढ़वा में… सांभा… कोई पोस्टरवा वोस्टरवा नई लगाए सरकार तोहार…मरगिला कुत्ता भी न डरे इब तोरे नाम... Read more »

दिन भर हाथ में गिलास…खुशदीप

प्रोफेसर ने क्लास लेना शुरू किया…हाथ में एक पानी से भरा गिलास पकड़ रखा था…पूरी क्लास को गिलास दिखाते हुए प्रोफेसर ने सवाल पूछा कि इस गिलास का वजन कितना होगा… बच्चों... Read more »

मासूम, गुड़िया और सफ़ेद गुलाब…खुशदीप

मैं घर के पास एक डिपार्टमेंटल स्टोर में कुछ ज़रूरी खरीदारी करने गया था…वहां एक बच्चा गुड़िया लेकर खड़ा था और कैशियर उसके पिग्गी बैंक से पैसे गिनकर कह रहा था…सॉरी बेटा,... Read more »

तोड़ दो गांधी के सारे बुत…खुशदीप

मायावती के बुत प्रेम पर लिखी पोस्ट पर भाई प्रवीण शाह, पी सी गोदियाल जी और मेरे अज़ीज़ धीरू भाई ने कुछ सवाल उठाए थे…उनके सवालों में दम है…उनके कहने का लब्बोलुआब... Read more »

मुंबई का भीखू म्हात्रे कौन…खुशदीप

आपने राम गोपाल वर्मा की फिल्म सत्या देखी होगी…अगर हां, तो आपको मनोज वाजपेयी का निभाया भीखू म्हात्रे का किरदार भी याद होगा…भीखू म्हात्रे फिल्म के एक दृश्य में चट्टान पर चढ़कर... Read more »

इक बुत बनाऊंगा …खुशदीप

इक बुत बनाऊंगा तेरा और पूजा करूंगा, अरे मर जाऊंगा प्यार अगर मैं दूजा करूंगा… इक बुत बनाऊंगा… (असली नकली, 1962) किसी पत्थर की मूरत से मुहब्बत का इरादा है, परस्तिश की... Read more »

ब्लॉग रत्न, ब्लॉग विभूषण, ब्लॉग भूषण, ब्लॉग श्री सम्मान…खुशदीप

अब आप कहेंगे ये कौन से सम्मान है भाई…क्यों जब लाख विवादों के बावजूद भारतरत्न, पद्मविभूषण, पद्मभूषण और पद्मश्री सम्मान बांटे जाते हैं तो क्या ब्लॉगवुड अपने लिए ब्लॉग रत्न, ब्लॉग विभूषण,... Read more »

मैं चला विदेश…खुशदीप

आप भी कहेंगे, ये बैठे बिठाए मुझे क्या सूझा…ये भारत-भारत रटते मैं विदेश का मुरीद कैसे हो गया…भई, अब क्या करूं…गुरुदेव समीरलाल जी समीर, राज भाटिया जी, अदा जी, कविता जी, अर्चना... Read more »

गणतंत्र बना सीनियर सिटीजन…खुशदीप

साठ साल का हो गया हमारा गणतंत्र…साठ साल की उम्र में नौकरीपेशा इंसान रिटायर हो जाता है…लेकिन हमारा गणतंत्र तो अभी सही ढंग से जवान भी नहीं हुआ…26 जनवरी 1950 को जब... Read more »