रोहिंग्या मुसलमानों का क्या किया जाए (पार्ट 1)…खुशदीप

कुछ कहना शुरू करूं उससे पहले चलिए थोड़ा अतीत में चलते हैं…1971 से पहले की स्थिति में…उस वक्त बांग्लादेश अस्तित्व में नहीं आया था…तब ये क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान के रूप में जाना... Read more »

हनीप्रीत से छुट्टी मिले तो अनीता की भी सुध ले लो…खुशदीप

राष्ट्रीय बहस का मुद्दा क्या होना चाहिए? गोरखपुर, फर्रूखाबाद के अस्पतालों में बच्चों की बड़ी संख्या में मौतें (ऑक्सीजन की कमी नहीं होने का सरकारी तर्क मान भी लिया जाए तो भी... Read more »

देशनामा की 1000वीं पोस्ट, याद आए सभी ब्लॉगर दोस्त…खुशदीप

17 अगस्त 2009 को शुरू हुए ‘देशनामा’ ने आज 8 साल 15 दिन में 1000 पोस्ट का सफ़र तय कर लिया है…इस मकाम तक पहुंचना आपके स्नेह और प्रोत्साहन के बिना संभव नहीं था…ये... Read more »

खुश रहना इतना आसान है, करके तो देखिए…खुशदीप

सफलता = खुशी अधिकतर लोग ऐसा ही समझते हैं…लेकिन वो ग़लत हैं…खुशी का विज्ञान हमें बताता है कि सही इसका उलट है…यानि खुशी =  सफलता सफलता आपके हाथ में नहीं होती…पूरे प्रयास... Read more »

गुरमीत राम रहीम : तेरे जीवन का है कर्मों से नाता…खुशदीप

डेरा सच्चा सौदा के मुखिया को ‘राम रहीम’ के नाम से बुलाना अब कितना जायज़ है…क्या सिर्फ गुरमीत कहना सही नहीं होगा…रोहतक की जेल में सोमवार को अस्थायी तौर पर लगाई गई सीबीआई की... Read more »

कोर्ट फैसले के बाद ही ‘राम रहीमों’ पर क्यों जागता है नेशनल मीडिया…खुशदीप

गुरमीत राम रहीम सिंह और उनके डेरे को लेकर अब मेनस्ट्रीम मीडिया में तरह तरह के किस्से आ रहे हैं…गुफा, ब्लू फिल्म, यौन शोषण, रिवॉल्वर, मारे जा चुके आतंकी गुरजंट सिंह से... Read more »

‘सच्चा सौदा’ है क्या ये तो जान लेते…खुशदीप

‘गुरमीत राम रहीम सिंह को यौन उत्पीड़न के 15 साल पुराने मामले में दोषी ठहराए जाने पर हरियाणा-पंजाब-चंडीगढ़ में स्थिति बेकाबू हो गई…इसकी आंच दिल्ली तक महसूस की गई…पंचकूला में सीबीआई की... Read more »

राम रहीम के आगे सब कुछ बौना क्यों…खुशदीप

देश में एक शख्स कितना ताकतवर हो सकता है ये डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह ने दिखा दिया है…राम रहीम पर यौन उत्पीड़न के आरोप से जुड़े मामले में... Read more »

गैया चराएंगे भावी पत्रकार…खुशदीप

पत्रकारिता के छात्रों के लिए करियर बनाने के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल हर तरह के माध्यम आज मौजूद हैं…इंटरनेट और मोबाइल ने पत्रकारिता का स्वरूप ही बदल दिया है…अब घटना घटते... Read more »

मोदी मुखौटा हैं, कॉरपोरेट के हिसाब से तय हो रहा है सब…खुशदीप

भाई काजल कुमार ने फेसबुक वॉल पर एक पोस्ट लिखी है…पोस्ट हिला देने वाली है नौकरीपेशा लोगों के लिए…या यूं कहिए केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों को छोड़ हर नौकरीपेशा व्यक्ति... Read more »