कहीं ब्लॉग पर ही पढ़ा था…गौरमिन्ट (गवर्मेंट का देशज) वो होती है जो मिनट-मिनट पर गौर करे…प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ईमानदारी पर कोई सवाल नहीं उठा सकता…उनके राजनीतिक विरोधी भी नहीं…लेकिन घर... Read more »
मैथ्स के टीचर ने छात्र से सवाल पूछा- अगर एक दीवार को बनवाने में दस हज़ार रुपये का खर्च आता है तो दो दीवार बनवाने में कितना खर्च आएगा… छात्र…दस करोड़ रुपये... Read more »
अजय कुमार झा, मैं और शाहनवाज़ सिद्दीकी, मौज के साथ रिपोर्टिंग की ज़िम्मेदारी का भी एहसास निर्मला कपिला जी और संगीता पुरी जी का खिलखिलाना यानि महफिल पर बहार का आना मां-बेटे... Read more »
ललित शर्मा जी की बात को ध्यान से सुनतीं संजू तनेजा (चेहरा नहीं दिख रहा), संगीता पुरी जी, निर्मला कपिला जी, डॉ अरुणा कपूर जी, श्रीमती अंजू सोहेल (अंतर सोहेल की धर्मपत्नी)... Read more »
कल माहौल हल्का करने के लिए महफूज़ पर पोस्ट लिखी…सब ने उसे अपने-अपने नज़रिए से लिया…किसी ने फिज़ूल पोस्ट माना…किसी ने महफूज़ का महिमामंडन…डांट भी मिली कि मैं महफूज़ की बेज़ा हरकतों... Read more »
कभी सुख, कभी दुख, यही ज़िंदगी है, ये पतझड़ का मौसम, घड़ी दो घड़ी है, नए फूल कल फिर, डगर में खिलेंगे, उदासी भरे ये दिन, कभी तो हटेंगे… कभी धूप तो... Read more »
आज महफूज़ मियां पर मज़ेदार पोस्ट लिखने का मूड था…मकसद यही था कि गेयर बदल कर फिर स्लॉग ओवरिया माहौल बनाऊं…लेकिन इसे आज टाल दिया…दरअसल पिछले दो महीने से मैं एक चीज़... Read more »
आज की माइक्रोपोस्ट मैं एक निजी प्रायोजन से लिख रहा हूं…दरअसल मैं आप सबसे अपने भतीजे करन सहगल के लिए एक छोटी सी मदद चाहता हूं…करन को दो साल पहले ब्रिटिश काउंसिल... Read more »
पिछले दस-ग्यारह दिन में जो देखा, जिया, महसूस किया, सहा, शब्दों में उतार पाना बड़ा मुश्किल है…लेकिन एक अल्पविराम के बाद जीवन के रंगमंच पर नाचने के लिए आपको फिर उतरना ही... Read more »
राम जी वनवास के बाद दीवाली वाले दिन ही घर लौटे थे…लेकिन मेरे राम दीवाली वाले दिन ही हमें हमेशा के लिए छोड़ कर चले गए…मेरे पापा का नाम श्री राम अवतार... Read more »