‘शीला की जवानी’ और श्लाका पुरुष विशाल डडलानी…खुशदीप

इस चेहरे को ज़रा गौर से देखिए…ये हैं विशाल डडलानी… शेखर के साथ जोड़ी बनाकर जनाब ओम शांति ओम और दोस्ताना जैसी कई सुपरहिट फिल्मों का म्युज़िक कम्पोज़ कर चुके हैं…लेकिन अब... Read more »

कहां जाएं बेचारे पप्पू और मुन्नी…खुशदीप

दो दोस्त बड़े दिनों बाद मिले…एक दोस्त ने दूसरे से बच्चों का हालचाल पूछा…दूसरे का जवाब था…पप्पू पास हो गया और मुन्नी बदनाम हो गई… किसी फिल्मी गाने में जीवित व्यक्ति के... Read more »

विदर्भ की भूख, गडकरी का भोज…खुशदीप

तस्वीर नंबर एक नागपुर में 1 दिसंबर से जश्न चल रहा है…बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी के घर शहनाई की गूंज है…गडकरी के बेटे निखिल का ऋतुजा के साथ 2 दिसंबर को... Read more »

ब्लॉग के दो अनमोल मोती…खुशदीप

आज पोस्ट पर अपना कुछ नहीं लिख रहा…आज बस सूत्रधार की भूमिका निभा रहा हूं…दरअसल आज ब्लॉगसागर के दो अनमोल मोती आप तक पहुंचा रहा हूं…एक मोती की चमक आप तक पहले... Read more »

बेटियों को अंतिम संस्कार का अधिकार क्यों नहीं…खुशदीप

जुड़वा बच्चों में बड़ा कौन…इस सवाल पर पंडित राधेश्याम शर्मा का मत बताने से पहले कुछ और अहम बात…मेरी कल की पोस्ट पर आई टिप्पणियों से एक बात साफ़ हुई कि माता-पिता... Read more »

जुड़वा भाइयों में कौन बड़ा…खुशदीप

एक अजब सा सवाल पूछ रहा हूं…पापा के दुनिया को अलविदा कहने के बाद पारिवारिक पंडित राधेश्याम शर्मा जी ने सारे कर्मकांड कराए…वो रोज़ घर पर गरूड़ कथा का पाठ भी करने... Read more »

पत्नीश्री, मैं और ट्रेड फेयर का डिप्लोमेटिक टूर…खुशदीप

पोस्ट पर कुछ लिखूं…उससे पहले पिछली पोस्ट पर आई निर्मला कपिला जी की ये टिप्पणी… अच्छा तो अब डिप्लोमेसी भी सीख गये हो? लेकिन बता दूँ मेरी बहू से डिप्लोमेसी नही करना।... Read more »

भारत लौटे राम, ‘बदमाश’ ब्लॉगर नहीं पहुंचे…खुशदीप

टाइटल पढ़कर चकराइए मत…सब बताता हूं…ज़रा सब्र तो रखिए…प्रवासी परिंदें इसी मौसम में सबसे ज़्यादा भारत का रुख करते हैं…वो जहां डेरा डालते हैं, वहां की बहार देखते ही बनती है…आबोदाना इनसान... Read more »

ये है दिल्ली मेरी जान…खुशदीप

ए दिल मुश्किल है जीना यहां,  ज़रा बच के, ज़रा हट के…ये है दिल्ली मेरी जान… गाने में बेशक मुंबई था लेकिन आज देश की राजधानी में लड़कियों या महिलाओं को यही... Read more »

रूल्स जो भारतीय फॉलो करते हैं…खुशदीप

मैं चाहे ये करूं, मैं चाहे वो करूं…मेरी मर्ज़ी…क्या हम भारतीयों के अंदर कोई आइडेंटिकल और टिपीकल जींस पाए जाते हैं…पृथ्वी सूरज का चक्कर काटना छोड़ सकती है लेकिन मज़ाल है कि... Read more »