कांग्रेस की मनमोहनी मजबूरी…खुशदीप

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुद्दों पर बुधवार को ऐसा नया कुछ नहीं कहा जो पहले न कहा हो…सिवाय इसके कि गलतियां हर इनसान से होती हैं, और उनसे भी हुई हैं…लेकिन उन्हें... Read more »

शौरी की शॉक-थिरेपी…खुशदीप

आज से करीब डेढ़ साल पहले 24 अगस्त 2009 को अरुण शौरी ने बीजेपी नेतृ्त्व के लिए हंप्टी-डंप्टी और एलिस इन ब्लंडरलैंड जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था…उस वक्त बीजेपी की कमान राजनाथ सिंह... Read more »

सादे शादी-ब्याह…क्यों न ब्लॉगर ही कोई पहल करें…खुशदीप

शादी तो एक बार ही होनी है…रोज़ रोज़ कोई ये दिन आना है…और फिर कमाते किस लिए हैं…सब इन बच्चों के लिए ही न…और फिर शादी-ब्याह तो वैसे भी बिरादरी में नाक... Read more »

40 करोड़ भूखों के देश में शादी तीन करोड़ की…खुशदीप

इमेजिन टीवी पर एक नया शो शुरू होने जा रहा है- शादी तीन करोड़ की…इमेजिन के सीनियर डायरेक्टर (मार्केटिंग एंड कम्युनिकेशंस)  निखिल मधोक के मुताबिक इस रियलिटी शो के विजेता परिवार को... Read more »

पैदा होते ही बेटियों को मार देना चाहिए…खुशदीप

पैदा होते ही बेटियों को मार देना चाहिए…ये बयान उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी ने दिया है…अब इस बयान के बाद ज़रा गौर फरमाइए कल यानि ग्यारह फरवरी को देश... Read more »

आरुषि जिसे आप नहीं जानते…खुशदीप

आरुषि यानि सूरज के उगने से ठीक पहले आकाश की लालिमा…ऐलान करती अंधेरे के छटने का और उजाले के छाने का…क्या आरुषि के लिए इनसाफ़ की कहानी में भी ऐसा होगा… आरुषि... Read more »

धर्म को ब्लॉगिंग में मिलेगा अब नया आयाम…खुशदीप

विगत 4 फरवरी को समीर लाल जी के कनाडा लौटने से पहले दिल्ली में उनसे मिलने के लिए कनॉट प्लेस में कई ब्लॉगर जुटे थे…लेकिन मेरे साथ वहां एक ऐसे शख्स भी... Read more »

लो फिर वसंत आई…खुशदीप

वसंत पंचमी पर बस आज मलिका पुखराज और उनकी बेटी ताहिरा सैयद की पुरकश आवाज़ में खो जाइए, मेरी तरह…यकीन नहीं आता तो सुनिए, वसंत का जादू आपके भी सिर चढ़ कर... Read more »

ब्लॉगर मिले, तस्वीरों की भी एक ज़ुबान होती है…खुशदीप

ये कोई मीट-वीट नहीं थी…समीर जी से मिलने का बस बहाना था…लेकिन जो मौका-ए-दस्तूर था, वहां सीमित जगह और व्यवस्था का कसूर था कि चाह कर भी हर किसी को न बुला... Read more »

दिनकर जी, मकान खाली करो कि वो कब्ज़ा जमाने आते हैं…खुशदीप

सदियों की ठंडी बुझी राख़ सुगबुगा उठी, मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है, दो राह, समय के रथ का घर्घर नाद सुनो, सिंहासन खाली करो कि जनता आती है… राष्ट्रकवि रामधारी... Read more »